सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में गतिमान समस्त पिण्ड एक दूसरे के आकर्षण से एक निश्चित पथ पर परिभ्रमण करते है। जिस प्रकार धरती में गुरूत्वाकर्षण शक्ति है वैसी ही शक्ति समस्त पिण्डों में अपनी क्षमता के अनुसार विद्यमान हैं। इस में भी एक ही सौर मण्डल में स्थित पिण्डों के बीच यह आकर्षण ज्यादा होता है। हमारे सौर मण्डल में सूर्य, चन्द्र, बुध, मंगल, धरती आदि समस्त पिण्डों जिसे ग्रह, उपग्रह या तारा कहा जाय के बीच में विशेष प्रकार का आकर्षण होता हैं। इसी सन्दर्भ में प्राणि जगत का निवास मात्र पृथ्वी पर होने से इस पर जो अन्य ग्रहों आदि का प्रभाव या आकर्षण होता है उससे मात्र धरती ही प्रभावित नहीं होती बल्कि उस पर स्थित चर-अचर, सजीव-निर्जीव सभी पदार्थों पर भी उसका प्रभाव देखने को मिलता हैं।
पृथ्वी के सबसे निकट पिण्ड चन्द्रमा है जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव धरती पर होता हैं। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण पूर्णिमा या अमावस्या को देखने को मिलता हैं। पूर्णिमा को सबसे ज्यादा असर समन्दर के पानी में ज्वार के रूप में देखने को मिलता हैं। वहीं अमावस्या को भाटा के रूप में देखने को मिलता हैं। जिसका सीधा असर यह होता है कि धरती पर जहां जहां पानी होगा वहां वहां चन्द्र के कारण ज्वार-भाटा का असर अवश्य होगा।
इसके प्रभाव को मानव मस्तिष्क पर देखा जाय तो पूर्णिमा या अमावस्या के दिन उसके शरीर में विद्यमान जल के कारण बनने वाला ज्वार-भाटा क्रोध के रूप में परिणित होकर सामने आता हैं।
यहीं क्रोध उसके विनाश का कारण बनता है। इसलिए हमारे धर्मग्रन्थों में पूर्णिमा व अमावस्या को व्रत, उपवास आदि रखने को कहा गया है जिसका प्रभाव यह होगा कि जब व्यक्ति उपवास करेगा तो वह जल का सेवन भी कम करेगा क्योंकि बिना भोजन के मानव जल का सेवन कम करता है। जिसके परिणामस्वरूप उसमें क्रोध भी कम पैदा होगा और वह हिंसात्मक कार्यवाही कम करेगा। अन्यथा उसका सीधा असर मानव दिमाग पर होता है और व्यक्ति की सोच बदल जाती है जिससे हिंसा पर उतारू हो जाता है। इस सोने पे सुहागे का काम करता है पूर्णिमा व अमावस्या पर होने वाले ग्रहण। जब-जब सूर्य व चन्द्र के ग्रहण होते है तब हत्या या आत्महत्या की घटनाएं बढती है।
वर्तमान में तीन-तीन ग्रहणों के एक साथ होने से मानव जीवन पर इसका व्यापक असर दिखाई देगा। गत 7 जुलाई 2009 को चन्द्र ग्रहण हुआ। उसके बाद 22 जुलाई को सदी का सबसे लम्बा सूर्य ग्रहण हुआ एवं 6 अगस्त को पुन: चन्द्र ग्रहण होने जा रहा है।
जिससे आप विभिन्न क्षेत्रों में हत्या, आत्महत्याओं की घटनाओं से रूबरू होंगे। इससे बचने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पूर्णिमा व अमावस्या को उपवास रखना चाहिए। जिस प्रकार देश के अन्न की बचत हेतु पूर्व प्रधानमन्त्री लालबहादुर शास्त्री ने सोमवार को व्रत रखने का आह्वान किया था।
Wednesday, August 5, 2009
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